Trump: पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कमला हैरिस की पहचान पर विवादित टिप्पणी की है, जिसने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में नई हलचल मचा दी है। शिकागो में नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्लैक जर्नलिस्ट्स कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने हैरिस की जाति और पहचान पर सवाल उठाते हुए कहा, “वह हमेशा भारतीय मूल की थीं, और केवल भारतीय मूल को बढ़ावा दे रही थीं। मुझे नहीं पता था कि वह कई सालों पहले तक अश्वेत हैं, जब तक कि वह संयोग से अश्वेत नहीं हो गईं।”
ट्रंप के इस बयान ने तुरंत ही प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है। उनका आरोप है कि हैरिस राजनीतिक लाभ के लिए अपनी पहचान बदल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हैरिस अब अश्वेत के रूप में जानी जाना चाहती हैं, जो उनके अनुसार “स्पष्ट रूप से असंगत” है।
कमला हैरिस, जो अमेरिका की पहली अश्वेत, महिला और दक्षिण एशियाई विरासत वाली उपराष्ट्रपति हैं, को लेकर ट्रंप की ये टिप्पणियाँ उनके प्रति व्यक्तिगत हमलों की एक श्रृंखला में शामिल हैं। ट्रंप की टिप्पणियों में यहूदी विरोधी आरोप भी शामिल हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और भी गरम हो गया है।
व्हाइट हाउस ने ट्रंप की टिप्पणियों की तीखी आलोचना की है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरिन जीन-पियरे, जो स्वयं एक अश्वेत महिला हैं, ने कहा, “किसी को भी किसी को यह बताने का कोई अधिकार नहीं है कि वे कौन हैं, वे कैसे पहचानते हैं। यह बयान पूरी तरह से अपमानजनक है।”
इस विवाद ने राजनीतिक दुनिया में पहचान और जातीयता के मुद्दे को एक बार फिर से गरमा दिया है। ट्रंप की टिप्पणियाँ न केवल कमला हैरिस बल्कि पूरे राजनीतिक परिदृश्य पर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती हैं: पहचान का उपयोग किस प्रकार से किया जाता है और राजनीतिक लाभ के लिए इसे कैसे प्रस्तुत किया जाता है?
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