वसुंधरा सरकार में मंत्री रहे और उनके खास सिपहसालारों में से एक यूनुस खान कांग्रेस ज्वाॅइन कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए वे कल रात ही दिल्ली पहुंच चुके थे। लेकिन अभी तक उन्होंने कांग्रेस ज्वाॅइन नहीं की। ऐसे में माना जा रहा है कि वे आज सीएम अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा की मौजूदगी में कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं।
विश्लेषकों की मानें तो वसुंधरा राजे उन्हें टिकट नहीं कटने का भरोसा नहीं दे पाई। इसलिए वे भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं क्योंकि टिकट वितरण में राजे की राय को इतनी तवज्जो नहीं मिल रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि राजपाल सिंह शेखावत समेत कई बड़े नेता पार्टी छोड़ सकते हैं।
भैंरोसिंह ने लड़वाया पहला चुनाव
बता दें कि सीकर के गणेदी गांव के रहने वाले यूनुस खान का जन्म 1 अगस्त 1964 को हुआ। इन्होंने डीडवाना से स्नातकोत्तर किया और फिर काम की तलाश में जयपुर आ गए। 80 के दशक के अंत में राजस्थान में भैंरोसिंह शेखावत की सरकार थी। शेखावत को डीडवाना और लाडनूं से चुनाव लड़ने के लिए किसी मुसलमान की जरूरत थी। ऐसे में उनकी मुलाकात शेखावत सरकार में केबिनेट मंत्री रहे रमजान खान से हुईं। इस पर रमजान ने यूनुस का नाम सुझाया। युनूस के बारे में कहा जाता है कि वे कायमखानी मुसलमान थे।यानी राजपूत से इस्लाम में कन्वर्ट हुए थे।
पहला चुनाव हारे थे यूनुस
इसके बाद शेखावत ने उनको 1998 में डीडवाना सीट से उतारा। लेकिन वे चुनाव हार गए। इसके बाद भाजपा ने उन्हें 2003 में फिर मैदान में उतारा और इस बार वे कांग्रेस के रूपाराम डूडी को हराकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद यूनुस 2008 और 2013 में भी डीडवाना से जीते। यूनुस खान वसुंधरा राजे की सरकार में परिवहन और पीडब्ल्यूडी मंत्री रहे। हालांकि 2018 में पार्टी ने उन्हें टोंक से सचिन पायलट के सामने उम्मीदवार बनाया लेकिन पायलट ने यूनुस खान को 54 हजार से अधिक मतों से पराजित किया।
