पकौड़ी लाल कोल की नई पार्टी से मिर्जापुर की राजनीति में नया मोड़
पकौड़ी लाल कोल ने समर्थकों के साथ बैठक करने के बाद नई पार्टी बनाने का फैसला लिया। उनका कहना है कि क्षेत्र की जनता पिछले 25 से 30 साल से उन्हें समर्थन देती आ रही है। उनके मुताबिक, समर्थकों ने ही अलग राजनीतिक पार्टी बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। अब देखना होगा कि पकौड़ी लाल कोल अपनी नई पार्टी के जरिए इस पुराने जनसमर्थन को राजनीतिक ताकत में कितना बदल पाते हैं। अगर वह मजबूत संगठन खड़ा करने और स्थानीय नेताओं को साथ लाने में कामयाब होते हैं, तो 2027 के चुनाव में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।
रिंकी कोल को टिकट मिलने के बाद ससुर की नाराजगी आई सामने
पकौड़ी लाल कोल के परिवार में राजनीतिक खींचतान की वजह टिकट को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। उनके बेटे राहुल कोल छानबे विधानसभा सीट से विधायक थे। राहुल कोल के निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें अपना दल (एस) ने उनकी पत्नी रिंकी कोल को टिकट दिया। रिंकी कोल चुनाव जीतकर विधायक बन गईं। रिपोर्टों के मुताबिक, पकौड़ी लाल कोल भी छानबे सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उनकी जगह बहू पर भरोसा जताया। इसी फैसले से उनकी नाराजगी की चर्चा शुरू हुई थी। अब अलग पार्टी बनाने के ऐलान को इसी राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, नई पार्टी के गठन के बाद बहू और ससुर के बीच राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाएंगे, यह आने वाला वक्त बताएगा।
अनुप्रिया पटेल की पार्टी के सामने विंध्य में नई चुनौती?
मिर्जापुर, सोनभद्र और आसपास के इलाकों में कोल समुदाय की मौजूदगी चुनावी लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। पकौड़ी लाल कोल लंबे समय से इसी क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनकी नई पार्टी का असर अपना दल (एस) के लिए चर्चा का विषय बन सकता है। हालांकि, सिर्फ नई पार्टी बनने से किसी दल का वोट बैंक टूटना तय नहीं है। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि पकौड़ी लाल कोल कितने मजबूत उम्मीदवार उतारते हैं, संगठन कितना तैयार करते हैं और जनता के बीच उन्हें कितना समर्थन मिलता है। 2027 के चुनाव में ही उनकी राजनीतिक ताकत की असली तस्वीर सामने आएगी।
पूर्व डीएम दिव्या मित्तल की पार्टी से भी बढ़ेगी सियासी हलचल
मिर्जापुर और विंध्य क्षेत्र में नए राजनीतिक विकल्पों की चर्चा के बीच पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल की राजनीतिक एंट्री भी सुर्खियों में है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने ‘जननीति भारत’ नाम से नई पार्टी बनाई है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र में नए दलों और नए चेहरों की मौजूदगी राजनीतिक मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है। हालांकि, इन दलों की असली ताकत उनके संगठन, उम्मीदवारों और जनता के बीच स्वीकार्यता से तय होगी।
2027 विधानसभा चुनाव में किसका बनेगा सियासी समीकरण?
पकौड़ी लाल कोल की नई पार्टी और दिव्या मित्तल की राजनीतिक पहल से मिर्जापुर-सोनभद्र क्षेत्र में चुनावी चर्चाएं तेज हो सकती हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये नए राजनीतिक विकल्प स्थापित दलों के सामने मजबूत चुनौती पेश कर पाएंगे? क्या पकौड़ी लाल कोल अपने पुराने जनाधार को नई पार्टी के साथ जोड़ पाएंगे? और क्या अपना दल (एस) अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाए रखेगा? फिलहाल, 2027 के चुनाव से पहले विंध्य की राजनीति में नए दावेदारों की एंट्री ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
