पंजाब: पंजाब के मानसा जिले में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपने हाथ में ले ली है। पंजाब सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से आश्वासन मिलने के बाद अब इस मामले में केंद्रीय एजेंसी ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, CBI की पांच सदस्यीय विशेष टीम मंगलवार देर रात मानसा के सिटी-2 पुलिस थाने पहुंची। यहां टीम ने करीब एक घंटे तक रुककर मामले से संबंधित दस्तावेज और जांच की फाइलें अपने कब्जे में लीं। अधिकारियों के अनुसार, CBI ने मामले में FIR दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
देर रात पुलिस थाने पहुंची CBI की टीम
मंगलवार रात करीब 11:30 बजे CBI की पांच सदस्यीय टीम मानसा के सिटी-2 पुलिस थाने पहुंची थी। टीम ने केस डायरी, फॉरेंसिक रिपोर्ट और आरोपी अश्विनी कुमार से संबंधित हथियार सहित जांच के अहम दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया।
अब केंद्रीय एजेंसी इन दस्तावेजों की जांच कर घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने और हत्या से जुड़े तथ्यों का पता लगाने की कोशिश करेगी।
नशे की दवाओं की बिक्री के एंगल से भी होगी जांच
CBI इस मामले में जांच का दायरा बढ़ा सकती है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या इलाके में मेडिकल स्टोरों पर ऐसी दवाओं या नशीले पदार्थों की बिक्री हो रही थी, जिनका परविंदर सिंह झोटा विरोध कर रहे थे।
जांच के दौरान आरोपी केमिस्ट अश्विनी कुमार और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर CBI संबंधित अदालत में आरोपियों की हिरासत हासिल करने के लिए आवेदन कर सकती है, ताकि उनसे पूछताछ कर मामले से जुड़े अन्य पहलुओं का पता लगाया जा सके।
हालांकि, नशीले पदार्थों की बिक्री और हत्या के बीच संबंध की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
क्या है परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड?
परविंदर सिंह झोटा पंजाब के मानसा जिले में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 13 अक्टूबर को मानसा जिले में दिनदहाड़े गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी।
इस घटना के बाद इलाके में मामला चर्चा का विषय बन गया। मामले की जांच CBI को सौंपे जाने के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय एजेंसी हत्या के पीछे की वजह, आरोपियों की भूमिका और संभावित अन्य कड़ियों की जांच करेगी।
अब CBI की जांच पर टिकी नजरें
CBI के हाथ में जांच आने के बाद केस से जुड़े दस्तावेजों, फॉरेंसिक साक्ष्यों और आरोपियों की भूमिका की नए सिरे से पड़ताल की जाएगी। एजेंसी यह भी जांच सकती है कि हत्या के पीछे व्यक्तिगत रंजिश थी या नशे के कारोबार के विरोध से जुड़ा कोई अन्य पहलू।
