वहीं, इसी मामले में हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को अभी राहत नहीं मिली है। पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/170 के तहत कार्रवाई शुरू की है। पुलिस के अनुसार, उन्हें आज एसईएम कोर्ट में पेश किया जाएगा।
कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में लिए गए थे नेहा बोरा और अभिजीत दीपके
16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मार्च शुरू होने से पहले ही पुलिस ने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया। इसके बाद AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया।
दोनों संगठनों ने आरोप लगाया था कि उन्हें अपने नेताओं के ठिकाने और उनकी स्थिति के बारे में जानकारी नहीं दी जा रही है। साथ ही, वकीलों से मिलने की अनुमति नहीं देने की बात भी कही गई थी।
तिरंगा फहराने के लिए जुटे थे करीब 2,000 लोग
अभिजीत दीपके ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने के लिए मार्च का आह्वान किया था। शुक्रवार शाम करीब पांच बजे तक इलाके में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ा दी गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, दीपके शाम करीब 4:50 बजे करोल बाग में एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता अनीश गावांडे के घर से निकले थे। उन्होंने महात्मा गांधी की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहन रखी थी और शरीर पर तिरंगा लपेटा हुआ था।
पुलिस से उनकी कहासुनी भी हुई। दीपके ने कहा कि वह प्रदर्शन करने नहीं, बल्कि कनॉट प्लेस में तिरंगा फहराने जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तिरंगा फहराने के लिए भी अनुमति जरूरी है।
नेहा बोरा ने भी मार्च आगे बढ़ाने की कोशिश की
अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद नेहा बोरा ने भी मार्च आगे बढ़ाने की कोशिश की। वह पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की मानव श्रृंखला पार कर सेंट्रल पार्क पहुंचना चाहती थीं।
हालांकि, शाम करीब 5:20 बजे उन्होंने मार्च का रुख मंडी हाउस की ओर कर दिया। इसके कुछ ही देर बाद पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। शाम सात बजे तक भारी सुरक्षा के बीच प्रदर्शन लगभग खत्म हो गया। दोनों नेताओं समेत करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।
CJP और AISA मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
विपक्षी नेताओं ने हिरासत पर उठाए सवाल, रिहाई की मांग
नेहा बोरा और अभिजीत दीपके की हिरासत को लेकर विपक्ष के कई नेताओं ने सवाल उठाए। डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दोनों की रिहाई की मांग की।
आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सवाल किया कि क्या तिरंगा लहराना अपराध है? समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी लोकतंत्र और वोट देने के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई।
CJP ने दिल्ली पुलिस से अभिजीत दीपके के ठिकाने की जानकारी मांगी थी और युवाओं के साथ किए जा रहे व्यवहार पर सवाल उठाए थे।
फिलहाल नेहा बोरा की रिहाई हो चुकी है, जबकि अभिजीत दीपके के मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उन्हें आज एसईएम कोर्ट में पेश किया जाना है।
