1979 में चीन ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ लागू की थी, जिसमें हर परिवार को एक ही बच्चा पैदा करने की सख्त हिदायत दी गई थी। इस नीति से चीन की जनसंख्या पर काबू पाया गया, जिससे देश की आर्थिक तरक्की तेज हुई। लेकिन अब, चार दशक बाद, इस नीति के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं, जिसके चलते चीन को अपनी आबादी बढ़ाने की अपील करनी पड़ रही है।
कामकाजी उम्र के लोगों की कमी
इस नीति के चलते चीन में बुजुर्गों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, जबकि युवा श्रम बल लगातार घट रहा है। देश में कामकाजी उम्र के लोगों की कमी हो रही है, जिससे आर्थिक विकास में रुकावट आ रही है। इसके अलावा, वृद्ध आबादी की देखभाल के लिए सरकार पर भारी बोझ पड़ रहा है, क्योंकि कम कामकाजी युवा वर्ग के कारण सामाजिक सुरक्षा और पेंशन प्रणाली पर दबाव बढ़ रहा है।
टू चाइल्ड पॉलिसी’ लागू की
चीन सरकार ने 2016 में ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ को खत्म कर ‘टू चाइल्ड पॉलिसी’ लागू की, और 2021 में इसे बढ़ाकर तीन बच्चों की अनुमति दे दी गई। इसके बावजूद, युवा पीढ़ी आर्थिक कारणों, करियर की प्राथमिकताओं और बढ़ती जीवन लागत के कारण बड़े परिवार नहीं बना रही है। चीन अब विभिन्न नीतियों के जरिए लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, जैसे कर छूट, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में रियायतें, और मातृत्व अवकाश बढ़ाना।
देश के भविष्य पर गहरा असर डाला
चीन की मौजूदा जनसांख्यिकीय समस्या ने देश के भविष्य पर गहरा असर डाला है, और यदि आबादी में यह गिरावट जारी रहती है, तो इसके दीर्घकालिक प्रभाव चीन की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता पर पड़ सकते हैं।
