Gujarat: गुजरात में हाल की भारी बारिश ने कई शहरों में बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है, जिसके परिणामस्वरूप 28 लोगों की मौत हो चुकी है। बिजली कनेक्शन टूट जाने के कारण लोग कई दिनों से अंधेरे में हैं। राज्य में 7 राष्ट्रीय राजमार्ग, 66 राज्य राजमार्ग, 92 अन्य सड़कें और 774 पंचायत सड़कें मिलाकर कुल 939 सड़कें बंद हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरे दिन गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को फोन करके हालात की जानकारी ली।
मौसम विभाग की भविष्यवाणियाँ और भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने अगले छह दिनों के दौरान 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। शुक्रवार को ओडिशा और तेलंगाना में भारी से अति भारी (20 सेमी से ज्यादा) बारिश और छत्तीसगढ़, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश (12 सेमी से ज्यादा) की चेतावनी दी गई है। सौराष्ट्र और कच्छ के ऊपर बना गहरा दबाव क्षेत्र 30 अगस्त को पूर्वी अरब सागर में चक्रवाती तूफान में बदल सकता है, जिससे व्यापक क्षेत्र में बारिश होने की संभावना है।
गुजरात में राहत और बचाव कार्य
गुजरात में बृहस्पतिवार को बारिश की तीव्रता कम हुई, जिससे स्थिति में थोड़ी सुधार दिखा है। वडोदरा और राज्य के अन्य इलाकों में नदियाँ अभी भी उफान पर हैं। 238 तहसीलें बाढ़ की चपेट में हैं। राहत कार्य में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सेना, वायुसेना और भारतीय तटरक्षक बल शामिल हैं। वडोदरा के विश्वामित्री नदी का जलस्तर 37 फुट से घटकर 32 फुट रह गया है। एनडीआरएफ ने महिला क्रिकेटर राधा यादव और उनके परिवार को सुरक्षित बचाया, और वायुसेना ने देवभूमि द्वारका में फंसे चार लोगों को हेलिकॉप्टर से निकाल लिया।
राजस्थान और त्रिपुरा में मौसम की स्थिति
राजस्थान में माउंट आबू और श्रीगंगानगर में भारी बारिश हुई है। श्रीगंगानगर के जैतसर में 80 मिलीमीटर और माउंट आबू में 49 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। अलवर, भरतपुर, बाड़मेर और उदयपुर में भी मध्यम बारिश हुई। मौसम विभाग ने 30 अगस्त से 1 सितंबर तक हल्की बारिश की संभावना जताई है और 2 सितंबर से कोटा, उदयपुर, और भरतपुर संभाग में भारी बारिश की चेतावनी दी है।
त्रिपुरा में भारी बाढ़ से 31 लोगों की मौत हो चुकी है और 15,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश को प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया है। राहत कार्यों के लिए केंद्र ने पांच सदस्यीय टीम भेजी है। बाढ़ के कारण 53,356 लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं।
मानसून की वापसी और कृषि पर प्रभाव
इस वर्ष देश में मानसून की बारिश सितंबर के अंत तक जारी रहने की संभावना है। मानसून की देरी से फसलों को नुकसान हो सकता है, विशेषकर चावल, कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों को। हालांकि, बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ेगी, जो सर्दियों में बोई जाने वाली फसलों जैसे गेहूं, रेपसीड और चना के लिए लाभकारी होगी।
मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सितंबर के तीसरे हफ्ते में कम दबाव का क्षेत्र विकसित होने की संभावना है, जिससे मानसून की वापसी में देरी हो सकती है। भारत ने गेहूं, चीनी और चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं और अत्यधिक वर्षा के कारण इन प्रतिबंधों को बढ़ाया जा सकता है। मानसून आमतौर पर जून में शुरू होता है और 17 सितंबर तक उत्तर-पश्चिमी भागों से वापस लौटता है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट और भविष्य की चुनौतियाँ
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व में हुई अधिक बारिश से भारत में फसलों को नुकसान हुआ है। 2015 से 2021 के बीच 33.9 मिलियन हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ, जबकि सूखे के कारण 35 मिलियन हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई। 2021 में 159 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था। ऐसे में भारत को प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों से निपटने के लिए अधिक सतर्क रहना होगा।
