Kolkata Doctor Case: कोलकाता दुष्कर्म हत्याकांड मामले में सीबीआई को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष और चार अन्य डॉक्टरों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अनुमति मिल गई है। सीबीआई ने गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में इस टेस्ट के लिए याचिका दायर की थी। कोर्ट ने इसे मंजूरी दे दी है।
सीबीआई के अनुसार, संदीप घोष और अन्य डॉक्टरों के बयानों में विसंगतियां पाई गई थीं, और पॉलीग्राफ टेस्ट से इन बयानों की सत्यता की पुष्टि की जा सकेगी। इस टेस्ट से सबूतों की भी पुष्टि होगी।
महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई जा रही
सीबीआई का दावा है कि इन डॉक्टरों ने इस मामले में जो बयान दिए हैं, उनमें काफी अंतर है, जिससे जांच एजेंसी को शक हुआ कि कुछ महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई जा रही हो सकती है। पॉलीग्राफ टेस्ट, जिसे आमतौर पर ‘लाई डिटेक्टर टेस्ट’ भी कहा जाता है, के माध्यम से ये जांचने की कोशिश की जाएगी कि क्या ये डॉक्टर सच बोल रहे हैं या नहीं।
इस मामले में हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद सीबीआई को अब इन डॉक्टरों के बयानों की सत्यता की जांच करने में मदद मिलेगी।
जघन्य अपराध की तह तक पहुंचना
कोर्ट का यह फैसला इस मामले की जटिलता और गंभीरता को दर्शाता है। पॉलीग्राफ टेस्ट का उद्देश्य न केवल आरोपियों के बयानों की पुष्टि करना है, बल्कि इस जघन्य अपराध की तह तक पहुंचना भी है।
सीबीआई की यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक हाई-प्रोफाइल मामला है और इसमें कई प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम शामिल हो सकते हैं। इस मामले का सही ढंग से निपटारा करना, न केवल न्याय दिलाने के लिए, बल्कि भविष्य में ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए भी आवश्यक है।
