Delhi: दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डीपीसीसी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सूचित किया है कि दिल्ली में ई-कचरे के अनुचित निपटान और प्रबंधन के खिलाफ एक नई पर्यावरण क्षति मुआवजा (ईडीसी) नीति जल्द ही लागू की जाएगी। इस नीति के तहत ई-कचरे के अनुचित निपटान या प्रबंधन में संलग्न उल्लंघनकर्ताओं पर दंड लगाया जाएगा।
नई ईडीसी नीति की प्रमुख बातें
डीपीसीसी ने बताया कि नई ईडीसी नीति के तहत उल्लंघनकर्ताओं पर दंड लगाने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाएगा। इस नीति के लागू होने के बाद, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ई-कचरे का उचित तरीके से निपटान किया जाए और उल्लंघनों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।
हालिया अभियान और दंड
हाल ही में जुलाई में, डीपीसीसी ने पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर, कांति नगर और मुस्तफाबाद जैसे क्षेत्रों में 132 इकाइयों के खिलाफ अभियान चलाया। इन इकाइयों पर कार्रवाई करते हुए उनकी बिजली काट दी गई थी। इसके अलावा, शहर के अन्य हिस्सों में सात डिफॉल्टर इकाइयों पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
ई-कचरा प्रबंधन में वर्तमान स्थिति
डीपीसीसी के अनुसार, दिल्ली में वर्तमान में 942 ई-कचरा उत्पादक पंजीकृत हैं, जिनका नियमित रूप से निरीक्षण किया जाता है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली में तीन अधिकृत ई-कचरा नवीनीकरणकर्ता हैं, जिनके पास प्रतिदिन 6.58 मीट्रिक टन ई-कचरा संभालने की क्षमता है। वहीं, नौ पंजीकृत ई-कचरा विघटनकर्ता हैं, जो प्रतिदिन 8.97 मीट्रिक टन ई-कचरा संभाल सकते हैं।
भविष्य की योजनाएं
डीपीसीसी ने कहा है कि ई-कचरा प्रबंधन की समग्र क्षमता बढ़ाने के लिए नवीनीकरणकर्ताओं और विघटनकर्ताओं की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
एनजीटी ने मार्च में विभिन्न राज्यों से ई-कचरे के निपटान के तंत्रों की जानकारी मांगी थी और डीपीसीसी को सलाह दी थी कि केवल अन्य वैधानिक अधिकारियों को निर्देश देने के बजाय समन्वय में आगे की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
नई ईडीसी नीति के लागू होने के बाद, उम्मीद की जा रही है कि दिल्ली में ई-कचरा प्रबंधन में और सुधार होगा और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ ठोस कदम उठाए जाएंग
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