Jammu and Kashmir: स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। डोडा जिले में चल रही एक मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने एक आतंकवादी को मार गिराया। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, मारे गए आतंकवादी के पास से एक एम4 राइफल और एक एके 47 बरामद किया गया है। ऑपरेशन अभी भी जारी है और क्षेत्र में रुक-रुक कर गोलीबारी की घटनाएं हो रही हैं।
मुठभेड़ का प्रारंभ और आतंकियों की खोज
अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षाबलों और पुलिस ने शिवगढ़-अस्सार पट्टी इलाके में छिपे विदेशी आतंकवादियों की तलाश के लिए एक संयुक्त अभियान शुरू किया था। अभियान के दौरान, घने जंगल में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। मुठभेड़ के दौरान कैप्टन दीपक सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए, और उन्हें सैन्य अस्पताल ले जाया गया। वहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
मुठभेड़ की स्थिति और आतंकवादियों की गतिविधियाँ
मंगलवार, 14 अगस्त 2024 की शाम को सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच गोलीबारी के बाद, आतंकवादी उधमपुर जिले के पटनीटॉप के पास के जंगल से डोडा में घुस आए। शाम करीब छह बजे सुरक्षाबलों को आतंकवादियों की मौजूदगी का पता चला था, और आधे घंटे बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। मुठभेड़ के दौरान आतंकवादी डोडा की पहाड़ियों की ओर भाग गए।
पहले के मुठभेड़ और आतंकवादियों के संगठनों की भूमिका
डोडा जिले में 26 जून 2024 को हुए एक अन्य मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया था। इन आतंकियों के पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से जुड़े होने का संदेह था। यह घटनाएं सुरक्षा बलों की ओर से आतंकवादियों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई को दर्शाती हैं।
महबूबा मुफ्ती का शोक और जम्मू-कश्मीर की स्थिति
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कैप्टन दीपक सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “डोडा में हुई त्रासदी को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है, जहां मुठभेड़ के दौरान कैप्टन दीपक सिंह शहीद हो गए। प्रशासन के सामान्य स्थिति के बड़े-बड़े दावों के बावजूद जम्मू-कश्मीर में हिंसा और तबाही का सिलसिला निर्दोष लोगों की जान ले रहा है।” महबूबा मुफ्ती ने राज्य में हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई और यह भी कहा कि प्रशासन को इन समस्याओं का समाधान निकालने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
इस प्रकार, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों की ताजातरीन सफलता और हिंसा की निरंतर घटनाओं ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
