RTO: लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए परिवहन विभाग ने बिना हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। परिवहन आयुक्त सीबी सिंह ने सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (आरटीओ) को एचएसआरपी न लगाने वाले वाहनों के खिलाफ विशेष टीमें बनाने और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
एचएसआरपी का महत्व और कार्रवाई
मंगलवार को जारी आदेश में, आयुक्त ने बताया कि एचएसआरपी की अनुपस्थिति सड़क सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न कर रही है। उन्होंने कहा कि जब तक सभी वाहनों में एचएसआरपी नहीं लग जाती, तब तक सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के प्रयासों में प्रभावी सुधार संभव नहीं है।
सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी की चिंता
प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की बढ़ती संख्या चिंताजनक है। इन दुर्घटनाओं को कम करने के लिए ओवरलोडिंग, ओवर स्पीडिंग, हेलमेट, सीटबेल्ट, मोबाइल फोन का इस्तेमाल, गलत साइड ड्राइविंग और शराब पीकर गाड़ी चलाने जैसे अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एचएसआरपी की स्थिति और आगामी योजना
परिवहन आयुक्त ने बताया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के निर्देशानुसार, ई-चालान और एएनपीआर कैमरों के जरिए उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, यह कार्रवाई केवल तभी प्रभावी हो सकती है जब 1 अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत सभी वाहनों में एचएसआरपी लगी हो।
सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 1 अप्रैल 2019 से पहले कुल 3 करोड़ वाहन पंजीकृत थे। इनमें से फरवरी 2023 तक केवल 80 लाख वाहनों में एचएसआरपी लगाई जा सकी है, जो कुल वाहनों का 26% से थोड़ा अधिक है। वाणिज्यिक वाहनों का प्रतिशत कुछ बेहतर है, लेकिन फिर भी यह संख्या संतोषजनक नहीं है।
आगे की दिशा
परिवहन विभाग की इस पहल का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना और दुर्घटनाओं की संख्या को कम करना है। एचएसआरपी की अनिवार्यता को सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को सक्रिय भूमिका निभाने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश में सड़क सुरक्षा के मानकों में सुधार होगा और दुर्घटनाओं की दर में कमी आएगी।
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