कैंसर के कितने स्टेज होते हैं और इसका क्या है मतलब? क्या चौथे स्टेज में हो सकता है ठीक?

कैंसर एक ऐसी जानलेवा बीमारी है जिसके बारे में जागरुकता बहुत जरूरी है। सबसे कठिन काम अर्ली स्टेज यानी पहले या दूसरे स्टेज में ही इसकी पहचान कर लेना है, क्योंकि तभी इसे कंट्रोल या ठीक किया जा सकता है। एकबार अगर यह बीमारी तीसरे या चौथे स्टेज में चली गई यानी शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल गई तो इससे जान बचाना मुश्किल है। यह बीमारी दुनियाभर में अब एक महामारी की तरह फैल रही है। हर साल लाखों की संख्या में लोगों की इससे मौत हो जाती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर कैंसर की स्टेज होती क्या है। कैंसर के हर एक स्टेज पर अलग-अलग तरह का इलाज है। स्टेज से ही यह भी पता चल जाता है कि मरीज की जिंदगी कितनी बची हुई है यानी वह कितने समय तक जिंदा रह सकता है।

दिल्ली स्थित कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर विनीत गोविंदा गुप्ता बताते हैं कि कैंसर के चार स्टेज होते हैं, लेकिन स्टेज इस बात पर भी निर्भर करता है कि कैंसर का प्रकार क्या है यानी मरीज को कौन सा कैंसर है। फेफड़े के कैंसर में सिर्फ दो स्टेज होते हैं, जबकि टेस्टीज के कैंसर में 3 स्जेट होते हैं। स्टेज से यह पता चलता है कि कैंसर कितना फैला हुआ है। कैंसर का स्टेज जितना ही ज्यादा होगा मरीज के बचने की उम्मीद उतनी ही कम होती जाएगी। कैंसर का स्टेज तय करने के लिए नियम बनाए गए हैं जिन्हें कैंसर विशेषज्ञ फॉलो करते हैं। कैंसर विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ कैंसर में 4 से ज्यादा स्टेज भी होते हैं, लेकिन ज्यादातर कैंसर में 4 स्टेज ही होते हैं।

कैसे पता करते हैं स्टेज

पहले स्टेज में कैंसर शरीर के किसी एक छोटे हिस्से तक ही रहता है। दूसरे स्टेज में कैंसर की साइज थोड़ी बड़ी हो जाती है और यह जिस जगह पर है वहां से थोड़ी दूरी तक फैल जाता है। वहीं तीसरे स्टेज में कैंसर शरीर के जिस अंग में है वहां आसपास तक फैल जाता है। चौथे स्टेज में कैंसर शरीर के कई हिस्सों तक फैल जाता है। इसे एडवांस स्टेज या मेटास्टेटिक कहा जाता है। पहले और दूसरे स्टेज तक तो कैंसर का काफी हद तक इलाज संभव है और ज्यादातर केसेज में मरीज लंबा जीवन जीता है। वहीं चौथे स्टेज में कैंसर का ठीक होना बहुत मुश्किल होता है। इस केस में इलाज भी बहुत जटिल होता है और मरीज के ज्यादा समय तक बचने की उम्मीद बहुत कम होती है।

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