Wayanad: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार, 1 अगस्त 2024 को केरल के वायनाड का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और पीड़ितों से मुलाकात की। राहुल गांधी ने इस विनाशकारी आपदा को देखकर 1991 में अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मृत्यु के समय की भावनाओं की तुलना की। वायनाड में हुए इस भूस्खलन में 250 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और लगभग 200 लोग घायल हुए हैं।
राहुल गांधी की प्रतिक्रिया और संवेदनाएं
राहुल गांधी ने वायनाड में भूस्खलन के कारण हुई भारी तबाही को देखकर दुख और सहानुभूति व्यक्त की। उन्होंने अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ अपने पूर्व संसदीय क्षेत्र का दौरा करते हुए कहा कि इस त्रासदी से वह उतना ही दुखी महसूस कर रहे हैं जितना कि 1991 में अपने पिता की मृत्यु के समय महसूस किया था। गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह वायनाड, केरल और पूरे देश के लिए एक भयानक त्रासदी है। हम यहाँ स्थिति का जायजा लेने आए हैं और यह देखना दुखद है कि कितने लोगों ने अपने परिवारों और अपने घरों को खो दिया है। हम मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि प्रभावित लोगों को उनका हक मिले।”
पीड़ितों की स्थिति और राहत कार्य
राहुल गांधी ने यह भी बताया कि कई लोग स्थानांतरित होना चाहते हैं और राहत कार्य अभी भी जारी है। उन्होंने डॉक्टरों, नर्सों, प्रशासन और स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत की सराहना की। उनके अनुसार, “यहाँ बहुत कुछ किया जाना बाकी है। हम आशा करते हैं कि जल्द ही स्थिति सामान्य हो सके।”
भूस्खलन की घटना और उसका असर
30 जुलाई 2024 को केरल के वायनाड जिले में मुंडक्कई और चूरलमाला क्षेत्रों में हुए भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई। इस हादसे में 256 से अधिक लोग मारे गए और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बचाव दल और राहत कार्यकर्ता इस समय लापता लोगों की खोज में जुटे हुए हैं। भूस्खलन के कारण क्षेत्र में कई घर और इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं, जिससे स्थानीय जीवन और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो गए हैं।
राहुल और प्रियंका गांधी के दौरे ने इस संकट के प्रति देश की संवेदनशीलता को उजागर किया है और राहत कार्यों में मदद के लिए एक सकारात्मक संकेत दिया है। उनका यह दौरा प्रभावित लोगों के लिए आशा की एक किरण साबित हो सकता है और राहत कार्यों को गति दे सकता है।
