puja khedkar: पुणे की प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर के विकलांगता प्रमाण पत्र को लेकर एक विवाद उठ खड़ा हुआ है। पूजा खेडकर ने 2022 में पुणे के यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल (वाईसीएम) अस्पताल से 7 प्रतिशत लोकोमोटर विकलांगता प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। हालांकि, यह मामला तब सुर्खियों में आया जब पता चला कि उनके प्रमाण पत्र में कई अनियमितताएँ थीं, जिनका तात्कालिक प्रभाव उनके सिविल सेवा परीक्षा प्रयासों पर पड़ सकता है।
puja khedkar: विकलांगता प्रमाण पत्र की अनियमितताएँ
पूजा खेडकर ने विकलांगता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए वाईसीएम अस्पताल का दौरा किया, जिसमें उनके बाएं घुटने में 7 प्रतिशत विकलांगता का उल्लेख किया गया। हालांकि, जांच में यह सामने आया कि अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग ने इस विकलांगता की कोई रिपोर्ट नहीं दी थी। इसके अलावा, पूजा खेडकर द्वारा प्रस्तुत पते का प्रमाण भी फर्जी पाया गया था।
वाईसीएम अस्पताल ने अपनी आंतरिक जांच में दावा किया कि प्रमाण पत्र जारी करने में कोई कदाचार नहीं पाया गया। अस्पताल के डीन राजेंद्र वाबले ने कहा कि प्रमाण पत्र सभी चिकित्सा परीक्षण नियमों के अनुसार जारी किया गया था।
puja khedkar: दिल्ली में अग्रिम जमानत पर सुनवाई
पूजा खेडकर के खिलाफ दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में अनुमति प्राप्त प्रयासों की संख्या को अवैध रूप से पार करने के लिए अपनी पहचान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया।
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने इस मामले में खेडकर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है और उनकी परीक्षा की उम्मीदवारी को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की है। यूपीएससी ने आरोप लगाया है कि खेडकर ने अपनी पहचान में फेरबदल करके परीक्षा नियमों का उल्लंघन किया।
निष्कर्ष
पूजा खेडकर के विकलांगता प्रमाण पत्र और सिविल सेवा परीक्षा के मामले ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि सरकारी दस्तावेजों की सच्चाई और पारदर्शिता कितनी महत्वपूर्ण है। इस मामले की पूरी जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खेडकर की ओर से किए गए प्रयास कितने वैध थे।
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