Wayanad: केरल के वायनाड जिले में भारी बारिश के कारण भयानक भूस्खलन हुआ, जिससे कम से कम 121 लोगों की मौत हो गई, 128 घायल हो गए और सैकड़ों लापता हो गए। इस आपदा ने राज्य में जलवायु संकट के गंभीर प्रभावों को उजागर किया है।
Wayanad: भूस्खलन का कारण और प्रभाव
लगातार कई दिनों तक भारी बारिश होने के बाद मंगलवार को भोर में वायनाड के चूरलमाला और मुंडक्कई गांवों में भूस्खलन हुआ। इस आपदा में कई गांव नष्ट हो गए, कीचड़ और मलबे में डूब गए, जिससे सड़कों और पुलों का विनाश हुआ। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने क्षेत्र में 64 मिमी से 200 मिमी बारिश का पूर्वानुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक बारिश इससे कहीं अधिक रही।
Wayanad: राहत और बचाव कार्य
सेना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) ने राहत और बचाव कार्यों के लिए कई टीमें तैनात कीं। हालांकि, बुनियादी ढांचे के विनाश, लगातार बारिश और इरुवनझिंजी नदी के बढ़ते पानी के कारण ये कार्य बाधित रहे। भारतीय वायु सेना के दो हेलिकॉप्टर भी प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुँचाने के लिए तैनात किए गए।
राज्य और राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, और वायनाड के पूर्व सांसद राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने शोक संवेदनाएँ व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने आपदा प्रबंधन विभाग के प्रभारी के राजन सहित पांच मंत्रियों को बचाव और राहत प्रयासों की निगरानी के लिए वायनाड भेजा।
भूस्खलन के पीछे का कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी घाटों पर अनियंत्रित विकास और दक्षिण-पूर्वी अरब सागर के गर्म होने के कारण भारत के पश्चिमी तट पर अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। 2017 से अब तक केरल में अत्यधिक बारिश और भूस्खलन के कारण करीब 900 लोगों की मौत हो चुकी है।
प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों का संघर्ष
चूरलमाला और मुंडक्कई के निवासी ऊंची जमीन पर शरण लेने के लिए मजबूर हो गए, जबकि बचाव दल ने उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए कड़ी मेहनत की। स्थानीय निवासी सफना टुट्टू ने कहा, “जब दूसरा भूस्खलन हुआ, तो हम अपने घरों से बाहर भागे, बिना सामने का दरवाज़ा बंद किए। आवाज़ ऐसी थी जैसे आपके नज़दीक किसी ट्रक से धातु उतारी जा रही हो। यह डरावना था। बिजली नहीं थी। अंधेरे में, हम किसी तरह ऊँची जगह पर एक परिचित के घर तक पहुँचने में कामयाब रहे।”
निष्कर्ष
वायनाड में हुए भूस्खलन ने राज्य की जलवायु संकट की गंभीरता को उजागर किया है। इस आपदा में सैकड़ों लोगों की जान गई और सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। यह घटना दिखाती है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इसके लिए तत्काल उपाय करने की आवश्यकता है।
Wayanad:
यहाँ पढ़े: मनुज कथूरिया: व्यवसायी, यूट्यूबर और अब जेल में – जानिए दिल्ली कोचिंग सेंटर घटना के बारे में सबकुछ
