Lucknow News: लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में धर्मांतरण और महिला डॉक्टरों के कथित उत्पीड़न से जुड़े मामलों में नया घटनाक्रम सामने आया है। विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने अपनी जांच रिपोर्ट में कई डॉक्टरों और कर्मचारियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच और नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान में कई वर्षों से कथित धर्मांतरण गतिविधियां संचालित होने के आरोपों की जांच की गई। इन आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
शासन ने केजीएमयू प्रशासन से मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट
एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर अपर मुख्य सचिव (गृह) ने केजीएमयू प्रशासन को पत्र भेजा है। इसमें चिन्हित कर्मचारियों के खिलाफ केजीएमयू अधिनियम, 2002 और परिनियमावली, 2011 के तहत नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही शासन को कार्रवाई की रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है। बताया गया है कि उत्तर प्रदेश यूथ एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवम श्रीवास्तव ने एसटीएफ मुख्यालय में शिकायत देकर केजीएमयू परिसर में धर्मांतरण और कथित ‘लव जिहाद’ से जुड़े आरोपों की जांच कराने की मांग की थी।
कई विभागों के डॉक्टरों और कर्मचारियों का उल्लेख
एसटीएफ की रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग, गांधी वार्ड, माइक्रोबायोलॉजी विभाग और अन्य इकाइयों से जुड़े डॉक्टरों तथा कर्मचारियों की भूमिका पर चर्चा की गई है। रिपोर्ट में संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है। हालांकि, किसी कर्मचारी के खिलाफ अंतिम कार्रवाई से पहले संबंधित नियमों के अनुसार जांच और पक्ष रखने का अवसर दिया जाना जरूरी होगा।
पैथोलॉजी विभाग के चार डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल
रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के चार डॉक्टरों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। एसटीएफ के आरोपों के मुताबिक, महिला रेजिडेंट डॉक्टरों की शिकायतों पर उचित ध्यान देने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और कथित आरोपित डॉक्टरों का पक्ष लिया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताकर उसकी शिकायत को दबाने की कोशिश की गई। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब और विभागीय जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
गांधी वार्ड और माइक्रोबायोलॉजी विभाग भी जांच के दायरे में
एसटीएफ ने गांधी वार्ड में तैनात नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की भूमिका का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट में आरोप है कि कुछ महिला कर्मचारियों की शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई और शिकायतकर्ताओं को ही नुकसान उठाना पड़ा। माइक्रोबायोलॉजी विभाग में कार्यरत एक संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी समाप्त किए जाने का मामला भी रिपोर्ट में शामिल बताया गया है।
दो मुकदमों का जिक्र, जांच संबंधित थानों में जारी
रिपोर्ट के अनुसार, एसटीएफ ने पुलिस उपाधीक्षक प्रमेश कुमार शुक्ल के नेतृत्व में जांच की। पैथोलॉजी विभाग की एक रेजिडेंट डॉक्टर ने 23 दिसंबर 2025 को चौक थाने में रमीज मलिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। वहीं, नर्सिंग स्टाफ की ओर से 29 दिसंबर 2025 को कैसरबाग थाने में रेजिडेंट डॉक्टर मोहम्मद आदिल के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। एसटीएफ रिपोर्ट के मुताबिक, रमीज मलिक को 9 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। दोनों मामलों की विवेचना संबंधित थानों में जारी बताई गई है।
इस्लामिक मेडिकोज समूह से संपर्क का आरोप
एसटीएफ रिपोर्ट में चार डॉक्टरों और कर्मचारियों के कथित तौर पर ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नामक मेडिकल छात्रों के समूह के संपर्क में रहने का भी उल्लेख है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि उन्हें संबंधित घटनाओं की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने मामले को सामने नहीं आने दिया। इन आरोपों की पुष्टि और संबंधित लोगों की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच प्रक्रिया के बाद ही किया जा सकेगा।
शासन ने कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा
एसटीएफ ने अपनी रिपोर्ट के निष्कर्ष में रमीज मलिक और कथित सहयोगियों के खिलाफ विभागीय जांच तथा अन्य नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि केजीएमयू की विशाखा समिति ने रमीज को आरोपों का दोषी पाया था। अब शासन की ओर से केजीएमयू प्रशासन से कार्रवाई कर रिपोर्ट मांगी गई है। मामले में आगे की स्थिति विभागीय जांच और संबंधित आपराधिक मामलों की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
