रबी सीजन में किसानों को मिलेगा सस्ता बीज, 10 लाख किसानों को मुफ्त मिनीकिट
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए रबी का मौसम राहत भरी खबर लेकर आया है। राज्य सरकार खेती की लागत कम करने और किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि रबी सत्र में किसानों को 12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही 10 लाख किसानों को दलहन और तिलहन की मिनीकिट मुफ्त में बांटी जाएंगी।
सरकार की इस पहल का मकसद किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराना और खेती में दलहन-तिलहन की हिस्सेदारी बढ़ाना है। इससे किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा दूसरी फसलें उगाने का मौका मिलेगा। साथ ही, फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलने से खेती को ज्यादा टिकाऊ बनाने में भी मदद मिल सकती है।
खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक खेती पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का जोर
उत्तर प्रदेश कृषि परिषद (उपकार) के 37वें स्थापना दिवस पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि खेती में खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती को भी प्राथमिकता देनी होगी। आज खेती के सामने उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की सेहत बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल करने की चुनौती भी है।
ऐसे में किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिनसे लंबे समय तक जमीन की उपजाऊ क्षमता बनी रहे। प्राकृतिक खेती और अलग-अलग फसलों की खेती को बढ़ावा देने से किसानों को नए विकल्प मिल सकते हैं। सरकार की कोशिश है कि किसान अपनी जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से खेती में बदलाव करें, ताकि उनकी आमदनी और उत्पादन दोनों को फायदा हो।
देश के 11 प्रतिशत भू-भाग से 22 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन कर रहा यूपी
कृषि मंत्री ने उत्तर प्रदेश की कृषि क्षमता का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य देश के कुल भू-भाग का करीब 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है, लेकिन देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 22 प्रतिशत है। यह आंकड़ा राज्य की खेती और किसानों की अहम भूमिका को दिखाता है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में फसल सघनता 196 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि यहां कृषि भूमि के बड़े हिस्से में साल के दौरान एक से ज्यादा बार फसल उगाई जाती है। खेती के क्षेत्र में राज्य की यह स्थिति खाद्य सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। हालांकि, उत्पादन को बनाए रखने के लिए किसानों को बेहतर बीज, नई तकनीक और खेती के टिकाऊ तरीकों से जोड़ना भी जरूरी है।
पराली जलाने के बजाय सीबीजी प्लांट से कमाई करने की अपील
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका इस्तेमाल आमदनी का जरिया बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है। इसके लिए 600 सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) प्लांट को संभावित अवसर के रूप में बताया गया।
फसल कटाई के बाद खेतों में बची पराली का सही इस्तेमाल होने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, कृषि अवशेषों का उपयोग बायोगैस बनाने जैसे कामों में किया जा सकता है। इससे पराली को बेकार समझकर जलाने के बजाय उपयोगी संसाधन के तौर पर देखने का विकल्प मिलेगा।
उपकार स्थापना दिवस पर कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों का सम्मान
उपकार के 37वें स्थापना दिवस समारोह में कृषि क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले संस्थानों, वैज्ञानिकों और किसानों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान 9 कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), उत्कृष्ट वैज्ञानिकों और 7 प्रगतिशील किसानों को सम्मान दिया गया।
इस सम्मान का उद्देश्य कृषि अनुसंधान, किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने और खेती में बेहतर प्रयोग करने वालों के योगदान को पहचान देना है। कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को नई तकनीकों, उन्नत बीजों और फसल प्रबंधन से जुड़ी जानकारी देने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कुल मिलाकर, सरकार का जोर खेती का उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की लागत कम करने, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने और फसल अवशेषों का बेहतर इस्तेमाल करने पर है। इन प्रयासों से उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों के लिए खेती को अधिक लाभकारी बनाने की उम्मीद है।
