आदिवासी परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था की सराहना
मुरिया दरबार में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और पारंपरिक प्रमुखों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि समय के साथ शासन व्यवस्था, नीतियां और कानून बदलते रहते हैं, लेकिन आदिवासी समाज ने अपनी परंपराओं, सामाजिक नियमों और अलिखित संविधान को पीढ़ियों से सुरक्षित रखा है।
उन्होंने कहा कि यह पारंपरिक व्यवस्था समाज में सुख-शांति, प्रेम, सद्भाव और सामूहिकता बनाए रखने का महत्वपूर्ण आधार है। राष्ट्रपति ने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के प्रयासों की सराहना की।
‘मैं भी आप लोगों में से एक हूं’
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भावुक भी हो गईं। उन्होंने कहा कि बस्तर के आदिवासी समाज ने उन्हें एक बार फिर अपनी संस्कृति और परंपराओं से रूबरू होने का अवसर दिया, जिसके लिए वह आभारी हैं।
राष्ट्रपति ने भावुक होते हुए कहा, “मैं भी आप लोगों में से एक हूं। मैं भी इसी आदिवासी संस्कृति और परंपरा से आती हूं।” उनके इस संबोधन ने वहां मौजूद लोगों के साथ उनके सांस्कृतिक जुड़ाव को व्यक्त किया।
बस्तर दशहरे की महत्वपूर्ण परंपरा है मुरिया दरबार
मुरिया दरबार बस्तर दशहरे के समापन की अंतिम रस्म मानी जाती है। इस आयोजन में आदिवासी समाज के प्रतिनिधि और पारंपरिक प्रमुख एकत्र होते हैं। यह बस्तर की विशिष्ट सामाजिक व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक निर्णय की परंपरा का प्रतीक है।
