राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज लद्दाख के सियाचिन बेस कैंप पहुंचीं। उनकी यह यात्रा विशेष रूप से देश के जवानों के मनोबल को बढ़ाने के उद्देश्य से थी। लद्दाख पहुंचने पर उपराज्यपाल बीडी शर्मा ने राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद राष्ट्रपति सीधे सियाचिन बेस कैंप गईं, जहां उन्होंने वहां तैनात भारतीय सेना के जवानों से मुलाकात की और उनके हौसले की सराहना की।
जवानों के साहस की तारीफ
सियाचिन ग्लेशियर, जिसे दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र माना जाता है, वहां तैनात जवानों के साथ बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ने उनकी वीरता और साहस की जमकर तारीफ की। उन्होंने जवानों के कठिन परिस्थितियों में भी देश की सुरक्षा में तत्पर रहने के जज्बे को सलाम किया। राष्ट्रपति ने कहा कि देशवासी अपने सैनिकों की बलिदान और सेवा भावना को कभी नहीं भूल सकते, और उनकी वजह से ही देश सुरक्षित है।
सियाचिन बेस कैंप का ऐतिहासिक दौरा
द्रौपदी मुर्मू से पहले भी दो पूर्व राष्ट्रपतियों, एपीजे अब्दुल कलाम और रामनाथ कोविंद, ने सियाचिन बेस कैंप का दौरा किया था। इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए द्रौपदी मुर्मू ने भी जवानों के साथ समय बिताया और उनकी जरूरतों व मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने जवानों को आश्वस्त किया कि सरकार उनकी सुरक्षा और सुविधाओं का हरसंभव ध्यान रख रही है।
जवानों का हौसला बढ़ाना मुख्य उद्देश्य
राष्ट्रपति की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के उन जवानों का हौसला बढ़ाना था, जो अत्यधिक विषम परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। इस अवसर पर जवानों ने भी राष्ट्रपति के साथ बातचीत कर अपने अनुभव साझा किए। राष्ट्रपति ने कहा कि जवानों की मेहनत और समर्पण की बदौलत ही देश अपनी सीमाओं की रक्षा कर पा रहा है, और वह सभी देशवासियों की ओर से जवानों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करती हैं।
इस यात्रा के माध्यम से राष्ट्रपति ने न केवल जवानों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि उन्हें यह संदेश भी दिया कि देश और सरकार उनके साथ खड़ी है।
