Maharashtra politics: महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले वहां की राजनीति गरमा गई है। हाल ही में अजित पवार गुट के नेताओं के शरद पवार से मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगने लगी थीं। इस बीच, एनसीपी विधायक राजेंद्र शिंगने ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि वे शरद पवार को छोड़ना नहीं चाहते थे, लेकिन एक मजबूरी के चलते उन्हें अजित पवार का साथ देना पड़ा।
महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल
शिंगने ने बताया कि जिस सहकारी बैंक से वे जुड़े थे, उसमें कुछ समस्याएं आ गई थीं। इस कारण से वे मजबूर होकर अजित पवार के साथ चले गए। उन्होंने कहा कि पार्टी में विभाजन के बाद, जब अजित पवार ने महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल होने का फैसला किया, तब उन्हें भी उनका साथ देना पड़ा। यह घटनाक्रम पिछले साल का है, जब अजित पवार और अन्य कई विधायकों ने एनसीपी में विभाजन कर शिवसेना-भाजपा गठबंधन सरकार में शामिल हो गए थे। इस विभाजन से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में गहरी दरार पैदा हो गई थी, जो शरद पवार द्वारा स्थापित की गई थी।
इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई है, और अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में इसका क्या असर पड़ता है।
इस कारण अजित पवार का दिया साथ
एनसीपी विधायक ने दावा किया है कि जिस सहकारी बैंक से वे जुड़े थे, उसमें दिक्कतें आने के कारण उन्हें पिछले साल पार्टी में विभाजन के बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का साथ देना पड़ा। अजित पवार और कई अन्य विधायक पिछले साल राज्य में शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल हो गए थे, जिसके कारण शरद पवार द्वारा स्थापित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में विभाजन हो गया था।
