पीआर श्रीजेश ने पेरिस में विनेश फोगट से रजत पदक छीनने पर की टिप्पणी: एक शानदार एथलीट का दर्द और संघर्ष

PR Sreejesh: ने विनेश फोगट के रजत पदक विवाद पर जताई चिंता"

PR Sreejesh: भारत के प्रमुख हॉकी गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने पेरिस में महिलाओं की 50 किग्रा कुश्ती में विनेश फोगट से ओलंपिक रजत पदक छीनने के विवाद पर अपनी टिप्पणी दी है। श्रीजेश ने खुलासा किया कि ओलंपिक फाइनल में विनेश को पदक से वंचित कर दिया गया क्योंकि उनके वजन की माप प्रतियोगिता के दिन 100 ग्राम अधिक थी।

विनेश फोगट ने फाइनल में जगह बनाकर भारतीय कुश्ती का नाम रोशन किया था, लेकिन उनके रजत पदक की उम्मीदों को उस समय धक्का लगा जब उन्हें प्रतियोगिता से अयोग्य घोषित कर दिया गया। खेल पंचाट न्यायालय (CAS) में संयुक्त रजत के लिए अपील की गई, लेकिन निर्णय अभी तक नहीं आया है। अगला अपडेट 16 अगस्त को अपेक्षित है।

पीआर श्रीजेश ने पीटीआई से बातचीत के दौरान इस घटना पर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा की। उन्होंने कहा, “विनेश को फाइनल में पहुंचने के बाद पदक छीन लिया गया, यह निश्चित रूप से उनके लिए एक कठिन स्थिति है। अगर मैं उनकी जगह होता तो क्या करता, इसका मुझे अंदाजा नहीं है।” श्रीजेश, जिन्होंने पेरिस खेलों में कांस्य पदक जीतने के बाद अपने शानदार करियर को अलविदा कहा, ने विनेश की स्थिति को एक ‘असली योद्धा’ की तरह स्वीकार किया।

श्रीजेश ने आगे बताया कि उन्होंने पेरिस खेलों के कांस्य पदक मैच के दिन विनेश से मुलाकात की। “वह अपने दर्द को छिपाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उनकी मुस्कान के पीछे का दर्द स्पष्ट था। वह वास्तव में एक प्रेरणादायक एथलीट हैं।”

उन्हें लगता है कि विनेश का मामला सभी भारतीय एथलीटों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। उन्होंने कहा, “ओलंपिक नियमों के बारे में सभी को पूरी जानकारी होनी चाहिए। हमें महासंघ, आयोजन समिति, और अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति को कोई मौका नहीं देना चाहिए।”

श्रीजेश ने भारतीय हॉकी खिलाड़ी अमित रोहिदास के मामले का भी उल्लेख किया, जिन्हें ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल के दौरान नियमों का उल्लंघन करने के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “नियमों के पालन से ही खेल को नियंत्रित और सुंदर बनाया जा सकता है।”

श्रीजेश ने अंत में विनेश के लिए शुभकामनाएं भेजी और कहा, “उनकी मेहनत और संघर्ष सभी के लिए प्रेरणा है। मुझे वास्तव में उनके लिए बुरा लगा, यह स्थिति उनके लिए बेहद कठिन है।”

इस तरह के बयान भारतीय एथलीटों के संघर्ष और मेहनत को उजागर करते हैं और उनके खेल के प्रति समर्पण को मान्यता प्रदान करते हैं। पीआर श्रीजेश की बातें इस बात का प्रमाण हैं कि खेल में नियमों और अनुशासन के पालन के बावजूद, एक एथलीट की मेहनत और संघर्ष को कभी नहीं भुलाया जा सकता।

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